आचार्य चाणक्य का भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। आचार्य चाणक्य ने सदियों पहले अपनी पुस्तक ‘चाणक्य नीति’ में जो बातें लिखीं थी वो आज भी बिल्कुल सही लगती हैं। चाणक्य को भारतीय इतिहास का सबसे समझदार व्यक्ति माना जाता है। चाणक्य ने हर चीज का एक अनोखा ही तरीका निकला है। वैसे तो चाणक्य ने खुशहाली भरे जीवन के लिए कई रहस्य बताएं हैं। लेकिन, इसके साथ ही चाणक्य ने ये भी बताया है कि किन कामों को करने में स्री या पुरुष को बशर्म हो जाना चाहिए। इन कामों में स्त्री या पुरुष को बेशर्म होने पर ही सफलता मिलती है।

स्त्री या पुरुष को बेशर्म होने पर ही सफलता

चाणक्य द्वारा लिखित पुस्तक ‘चाणक्य नीति’ हमें जीवन जीने का सही रास्ता बताती है। चाणक्य ने सदियों पहले जो नियम दुनिया को बताएं हैं वो आज के युग में भी बिल्कुल सही हैं। उनकी बातों को जो स्त्री या पुरुष अपने जीवन में अपनाते हैं, उनका जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहता है। जीवन की हर परेशानी का हल बताने वाले चाणक्य ने स्त्री हो या पुरुष को बताया है कि उन्हें कुछ कार्य में लाज और शर्म बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। अगर वो इन कार्यों को करने में शर्म का अनुभव करते हैं तो उन्हें कभी भी सफलता नहीं मिल सकती है। चाणक्य ने जीवन में कुछ काम ऐसे बताएं हैं जिन्हें करने के लिए बेशर्म होना अनिवार्य है। चाणक्य ने बताया है कि अगर कोई इन कार्यों को करने में शर्म करता है तो वह स्वयं का नुकसान करता है।

इस संदर्भ में आचार्य चाणक्य ने एक श्लोक कहा है –

धनधान्यप्रयोगेषु विद्वासंग्रहणे तथा।

आहारे व्यवहारे च त्यक्तलज्ज: सुखी भवेत्।।

#1.

जीवन में कुछ कार्य ऐसे भी हैं जिनमें स्त्री या पुरुष को बेशर्म होने पर ही सफलता मिलती है। इन कार्यो में सबसे पहला कार्य पैसों से संबंधित कार्य हैं। ये बात तो हम सभी जानते हैं कि पैसा आज के समय में कितना महत्वपूर्ण है। इसलिए आचार्य चाणक्य ने बताया है कि पैसे के मामले में शर्म करने से आर्थिक हानि सहनी पड़ती है। इसलिए किसी व्यक्ति को उधार दिए रुपयों को वापस मांगने में बेशर्म होना ही चाहिए। शर्म करने पर उसका पैसा उसे कभी वापस नहीं मिल सकता है।

 #2.

अमूमन देखा जाता है कि कुछ लोग कहीं जाते हैं तो भोजन करते समय शर्म करते हैं। ऐसे पुरुष या स्त्रियों को सीख देते हुआ आचार्य चाणक्य ने कहा है कि भोजन के मामले में शर्म करने वाला व्यक्ति भूखा रहता है। जो लोग कहीं पर भोजन करने में शर्म करते हैं उन्हें भुखा रहना पड़ता है। चाणक्य ने बताया है कि किसी भी स्त्री या पुरुष को भोजन के मामले में बेशर्म होना चाहिए। क्योंकि, शर्म करने से उन्हें भूखे पेट ही सोना या रहना पड़ता है। चाणक्य ने ये बात उन लोगों के लिए कही हैं जो अपने सगे-संबंधियों के यहां शर्म के कारण भर पेट भोजन नहीं करते हैं।

#3.

चाणक्य ने स्त्री पुरुषों के अलावा बच्चों को भी एक जरुरी सीख दी हैं। उन्होंने कहा है कि जो शिष्य गुरु से प्रश्न पूछने में शर्म करते हैं उन्हें कभी भी ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। चाणक्य ने बताया है कि शिष्य को शिक्षा के समय बेशर्म होना चाहिए। उसे अपने गुरु से सवाल पूछना चाहिए।