नई दिल्ली: यह दुनिया रहस्यों से भरी हुई है। यहाँ आए दिन किसी ना किसी रहस्य से पर्दा उठता रहता है। हम अक्सर सोचते हैं कि आख़िर इतने रहस्यों के बारे में कहाँ से पता चलता रहता है। आप तो जानते ही हैं कि यह दुनिया आज से नहीं बल्कि लाखों-करोड़ों सालों से है। प्राचीनकाल में रहने वाले लोग अपने पीछे बहुत कुछ छोड़कर गए हैं। समय के साथ-साथ उनके द्वारा छोड़ी गयी चीज़ें अब हमारे सामने धीरे-धीरे आ रही हैं। अक्सर आपने देखा होगा कि कई लोगों को खुदाई के दौरान कुछ अजीबो-ग़रीब चीज़ें मिलती रहती हैं।

इसी क्रम में एक और नया मामला जुड़ गया है। जी हाँ जर्मनी के रहने वाले एक 13 साल के बच्चे को खुदाई के दौरान एक ऐसी नायाब चीज़ मिली है, जिसके बारे में उसने सपने में भी नहीं सोचा था। आपकी जानकारी के लिए बता दें 13 साल के बच्चे को 10वीं शताब्दी का एक ऐसा ख़ज़ाना मिला है, जिसके बारे में उसे कुछ भी मालूम नहीं था। बच्चा इसे एक सामान्य चीज़ ही समझ रहा था, लेकिन यह एक नायाब ख़ज़ाना है। इसकी जानकारी उसे जाँच के बाद हुई कि यह एक सामान्य चीज़ नहीं बल्कि एक नायाब ख़ज़ाना है।


जानकारी के अनुसार 13 साल के बच्चे का नाम लूका मलास्नानिट्चेंकों बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार बच्चे को मिली यह नायाब चीज़ 10वीं शताब्दी में डेनमार्क के राजा हैराल्ड का सबसे बड़ा ख़ज़ाना था। दरअसल लका को मिला ये ख़ज़ाना कोई मामूली चीज़ नहीं बल्कि 10वीं शताब्दी का एक ब्लूटूथ सिक्का है। अब आप सोच में पड़ गए होंगे कि आज के ज़माने की खोज बतायी जाने वाली ब्लूटूथ 10वीं शताब्दी में कैसे हो सकता है। आपको बता दें इस बात से आप ही नहीं बल्कि सभी लोग हैरान हैं।


एक अंग्रेज़ी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार लूका अपने गुरु रीने स्कोएन के साथ ख़ज़ाने की खोज में निकला था। बता दें कि रीने एक पुरातत्ववेत्ता हैं जो ख़ज़ाने की खोज में उत्तरी रेजिजन द्वीप पहुँच गए थे। उनके पास एक ख़ास क़िस्म की मेटल डिटेक्टर मशीन भी थी। सिक्का एल्यूमिनियम का बताया जा रहा है। जब यह मिला तो शुरुआत में उन्हें लगा कि यह कोई फ़ालतू चीज़ है। लेकिन जब सिक्के की जाँच की गयी तो सबके होश उड़ गए। यह चोटी सी चीज़ उनके जीवन की अब तक की सबसे बड़ी खोज साबित हुई है।

जानकारी के अनुसार इस सिक्के को खोजने के लिए लूका और उसके गुरु रीने ने लगभग 400 वर्ग मीटर की गहरी खुदाई की। सिक्के को लेकर सबसे हैरान करने वाली बातें यह की जा रही हैं कि उस ज़माने में इन सिक्कों में ब्लूटूथ लगे होते थे। हम यह जानते हैं कि 10वीं शताब्दी के सिक्के में ब्लूटूथ होने की बात हर किसी के समझ से परे है, लेकिन इस बात का दावा हम नहीं बल्कि पुरारतव के जानकार कर रहे हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि बाज़ार में इस सिक्के की क़ीमत आपकी सोच से कई गुना ज़्यादा बताई जा रही है।