हिंदु धर्म में सुहागिन स्त्रियों के पहनावे और साज-श्रृगांर के लिए कुछ विशेष नियम बनाए गए, दरअसल प्राचीन मान्यताओं के अनुसार सुहागन स्त्री के लिए जो श्रृंगार की वस्तु और आभुषण अनिवार्य किए गए है, उनका श्रृंगार से कहीं अधिक महत्व सुहाग के निशाना के रूप में है.. जैसे कि सिंदूर, बिछिया, चुड़ी और गले में धारण किया जाने वाला मंगलसूत्र । पर आज के आधुनिक समय में ये सभी चीजें, श्रंगार की वस्तु बनकर रह गई हैं, ऐसे में इनसे जुड़े प्राचीन नियम और मान्यताएं कहीं भुली दी गई हैं। लेकिन वहीं धार्मिक मान्यताओं की माने तो मंगसूत्र से जुड़े नियमों का उलंघन करना सुहाग और दाम्पत्य जीवन के लिए अनिष्टकारी हो सकता है। आज हम आपको मगंलसूत्र से जुड़ी कुछ जरूरी नियमों और मान्यताओं के बारे में बता रहे हैं, जिनका पालन करना सुहाग की रक्षा और दाम्पत्य जीवन की खुशहाली के लिए बेहद आवश्यक है।

विवाह के समय वर, वधु के गले में मगंलसूत्र बांधता है, जिसके साथ ही विवाह की रस्म पूरी मानी जाती है, धार्मिक मान्यताओं की माने तो ये सुहाग की निशानी है, ऐसे में विवाहिता स्त्री के गले में इसका होना आवश्यक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में मगंलसूत्र में मौजूद पीला सोना देवी पार्वती और काले मोती भगवान शिव के प्रतीक माने जाते हैं, ऐसे में मंगलसूत्र, वैवाहिक जीवन की सफलता के लिए आवश्यक माना जाता है। वहीं ज्योतिष में भी मंगल सूत्र के महत्व को स्वीकार किया गया है। दरअसल मंगलसूत्र में मौजूद सोना बृहस्पति का कारक माना गया है और बृहस्पति ग्रह की मजबूती से विवाहित जीवन की खुशिया प्राप्त होती हैं। वहीं मंगलसूत्र में मौजूद काले मोती शनि, राहू,केतु और मंगल ग्रह के दुष्प्रभाव से पति-पत्नी को बचाते हैं और दाम्पत्य जीवन को खुशहाल बनाते हैं।

इस तरह से धार्मिक और ज्योतिष की दृष्टि से देखा जाए तो विवाहिता स्त्री के लिए मंगलसूत्र धारण करना शुभ फलदायी होती है, ये दाम्पत्य जीवन की सफलता के लिए आवश्यक होता है, पर इसके साथ ही मंगलसूत्र धारण करते समय कुछ सावधानी बरतनी भी आवश्यक है, जबकि आज के मौजूदा दौर में मंगलसूत्र भी फैशन की वस्तु बनकर रह गई.. ऐसे में आधुनिकता की चक्कर में मंगलसूत्र से जुरूरी नियमों की अवहेलना सुहाग के लिए अनिष्टकारी साबित हो सकती है, जैसे कि ..

1 प्राचीन मान्यताओं की माने तो विवाह के समय जब वधु, वर के हाँथो मंगलसूत्र धारण करती है तबसे उसका उतारना वर्जित होता है, ऐसे में अगर किसी कारणवश विवाहिता स्त्री को मंगलसूत्र उतारना पड़ जाए तो उसके स्थान पर गले में एक काले धागे का धारण कर लेना चाहिए।

2 किसी भी विवाहिता महिला को दूसरी किसी स्त्री का मंगलसूत्र नहीं पहनना चाहिए, ऐसा करने से पति की आयु कम होती है, साथ ही पति-पत्नी में आपसी मनृमुटाव होता है।

3 मंगलसूत्र में सोना का होना आवश्यक है, जबकि आजकल महिलाएं फैशन के लिए नकली मंगलसूत्र धारण कर लेती हैं जो कि गलत है। दरअसल मंगलसूत्र का पीला सोना वैवाहिक जीवन की सफलता का परिचायक माना जाता है, ऐसे में मंगलसूत्र में सोने की बजाए किसी दूसरी धातु का होना अशुभ माना जाता है।

4 मंगलसूत्र में काले मोतियों का होना भी अनिवार्य हैं, क्योंकि ये काले मोती वैवाहिक जीवन की खुशियों और पति को बुरी नजर से बचाते हैं। ऐसे में मंगलसूत्र में इन काले मोतियो का होना बेहद जरूरी है। जबकि आज के समय मंगलसूत्र को सुंदर बनाने के लिए काले मोतियों की जगह लाल और दूसरे रंग के मोती के साथ और भी दूसरी चीजें इस्तेमाल की जाने लगी हैं, जो कि धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो गलत है।